डीबीटी और ई.केवाईसी के फेर में फंसी बुजुर्गों की पेंशन, दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर
मालथौन। बुढ़ापे का एकमात्र सहारा कही जाने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन पिछले कुछ महीनों से बुजुर्गों के लिये जी का जंजाल बन गई है। शासन द्वारा ई.केवाईसी और डीबीटी के नाम पर कड़े नियम लागू करने से मालथौन क्षेत्र के सैकड़ों बुजुर्गों की पेंशन अटक गई है। 600रु. की अपनी ही पेंशन पाने के लिये ये लाचार बुजुर्ग इस कड़कड़ाती धूप और उम्र के इस पड़ाव में बैंक से लेकर नगर व जनपद पंचायत तक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। पेंशनधारी बुजुर्ग हर महीने इस उम्मीद में बैंक पहुंचते हैं कि उनकी राशि आ गई होगी, लेकिन वहां से उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। मालथौन निवासी श्यामलाल अहिरवार ने अपना दर्द बयां करते हुये बताया पिछले चार महीने से मेरी पेंशन नहीं आई है। दफ्तरों के चक्कर काट काटकर थक चुका हूं लेकिन कोई सही रास्ता नहीं बता रहा। ऐसी ही आप बीती खैराई निवासी दलु अहिरवार की है। उन्होंने बताया कि चार महीने से वृद्धावस्था पेंशन न आने के कारण वे परेशान हैं। दलु के मुताबिक कई बार बैंक जाकर चेक करा लिया। पंचायत से लेकर जनपद कार्यालय तक गुहार लगाई। अधिकारी बस एक ही बात कहकर टाल देते हैं कि बैंक जाओ और खाते में डीबीटी करवाओ। बैंक जाते हैं तो वहां लंबी लाइनें और तकनीकी दिक्कतों का बहाना बना दिया जाता है। दरअसल सरकार ने पेंशन घोटाले रोकने के लिये बैंक खातों को आधार से लिंक करने और डीबीटी सक्रिय करना अनिवार्य कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों को इस तकनीकी प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं है। अंगूठे के निशान न मिलने या बैंक सर्वर डाउन होने के कारण उनका ई.केवाईसी नहीं हो पा रहा है। नतीजतन बैंक उन्हें पंचायत भेजते हैं और पंचायत वाले बैंक का रास्ता दिखा देते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस गंभीर मानवीय समस्या पर ध्यान देकर गांवों में ही विशेष कैंप लगाने चाहिये, ताकि इन बेसहारा बुजुर्गों को राहत मिल सके।