वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के 439 हेक्टेयर वन क्षेत्र में तैयार हुआ चीतों का तीसरा घर तार फेंसिंग के साथ सोलर करंट से होगी चीतों की सुरक्षा
चीतों को बसाने से पहले जागरूकता अभियान 40 गांवों में 4 हजार लोगों को दिया प्रशिक्षण
रिपोर्ट - विशाल रजक
तेंदूखेड़ा। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के 439 हेक्टेयर वनक्षेत्र में चीतों का तीसरा घर 80 फीसदी तैयार हो चुका है। इस महीने के अंत तक चीतों को बसाने की तैयारी पूरी हो जाएगी। मप्र में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ ही उनके आवास भी बढ़ाए जा रहे हैं। कूनो के बाद गांधी सगार अभयारण्य में तीन चीतों को शिफ्ट किया जा चुका है अब इनका नया ठिकाना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में तैयार हो रहा है। इसके लिए 50 वनकर्मियों को कूनो में प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है। इसके अलावा चीतों की सुरक्षा के लिए जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत अब तक आसपास के 40 गांवों में जागरुकता अभियान चलाया जा चुका है, जिसके तहत 4 हजार से अधिक लोगों को चीतों से जुड़ी जानकारी दी गई है। कूनो में चीतों के लिए कुल 5 बाड़े बनाए जा रहे हैं। इनमें सुरक्षा की दृष्टि से 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वॉरंटीन बाड़े होंगे। बाड़ों के ऊपरी हिस्से में 6 लेयर के इलेक्ट्रिक पल्स तार लगाए जाएंगे, जो शिकारी जानवरों को दूर रखेंगे। बीचों-बीच बने क्वारंटीन बाड़े से चीतों के स्वास्थ्य और गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाएगी। जानकारी के अनुसार, कूनो के प्रसिद्ध चीते गौरव के साथ ही दो नर और दो मादा चीतों को यहां शिफ्ट किया जा सकता है। कूनो अब मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के लिए एक लॉन्चिंग पैड बन चुका है, जहां चीतों की संख्या अब 53 हो गई हैं
*क्वारंटीन बोमा व सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार*
चीतों के लिए टाइगर रिजर्व में क्वारंटीन बोमा और सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार हो चुके हैं। जब किसी वन्यजीव को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाया जाता है तो सबसे पहले उसे क्वारंटीन बोमा में रखा जाता है। यहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह किसी संक्रमण या बीमारी से मुक्त है। यह एक अलग-थलग बाड़ा होता है, जहां वन्यजीवों की सघन निगरानी की जाती है। क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद जब जानवर पूरी तरह स्वस्थ होकर नए वातावरण के अनुकूल हो जाते हैं तो उन्हें सॉफ्ट रिलीज बोमा में शिफ्ट किया जाता है। यह एक बड़ा बाड़ा होता है, जिसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास से परिचित कराने के लिए बनाया जाता है। यहां वे शिकार करना और नए माहौल में रहना सीखते हैं इस दौरान उन्हें धीरे-धीरे प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन वे अभी पूरी तरह खुले जंगल में नहीं होते। इस बाड़े में अनुकूलन पूरा होने के बाद उन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया जाता है
एक ही जंगल में रहेंगे बाघ, तेंदुआ और चीता
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह देश का ऐसा अनूठा रिजर्व होगा जहां बाघ, तेंदुआ और चीता एक ही जंगल में अलग-अलग स्थानों पर रहेंगे टाइगर रिजर्व में शिकार चीतों के लिए शिकार के भी इंतजाम किए गए हैं। यहां के मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज में 600 वर्ग किमी के खुले मैदान हैं, जहां चिंकारा, चीतल और सांभर की बहुतायत है विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों शिकारी प्रजातियों के शिकार का तरीका अलग होने के कारण इनके बीच संघर्ष की स्थिति बहुत कम बनती है
सोलर करंट से होगी चीतों की सुरक्षा
रिजर्व में बाघ तेंदुओं की पर्याप्त संख्या है यहां चीतों को लाने से पहले संशय जताया जाता रहा है कि प्रकृति में तीन बिग कैट जब एक साथ जंगल में होंगी तो इनकी सुरक्षा कैसे होगी बहरहाल बाड़े में चीतों की मौजूदगी के दौरान विशेष तरह की तार फैसिंग तैयार की गई है यहां सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं इससे चीतों की सुरक्षा के लिए फैसिंग के ऊपरी हिस्से में तार की सुरक्षा दीवार रहेगी इसमें 24 घंटे 365 दिन हलका करंट रहेगा, जो किसी भी छोटे-बड़े जानवर सहित शिकारियों ने चीतों की सुरक्षा करेगा कोई भी इस करंट की दीवार को पार कर अंदर नही जा सकेगा
एक नजर में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1975 में हुई थी
तब इसका क्षेत्रफल 1197 वर्ग किमी था
20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला इसका नाम वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व कर दिया गया
अब इसका क्षेत्रफल 2339 वर्ग
किमी (एमपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व) है। इसमें 1414 वर्ग किमी कोर एरिया और 925.12 वर्ग किमी बफर एरिया शामिल है
मुख्य रूप से टाइगर रिजर्व तीन जिले की सीमा क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें दमोह सागर और नरसिंहपुर जिलों में फैला है
इनका कहना है
चीतों के लिए रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व का 439 हेक्टेयर का क्षेत्र चीतों के लिए 80 फीसदी तैयार हो चुका है। कुछ दिन में ही चीतों को बसाए जाने की तैयारी पूरी हो जाएगी।
रजनीश सिंह, डिप्टी फील्ड डायरेक्टर रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व