शादी का निमंत्रण देने गए पिता की सड़क हादसे में मौत, शादी की खुशियां मातम में बदलीं
सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल, छह माह में 25 से अधिक मौतें, एक और परिवार उजड़ा तेंदूखेड़ा से जबलपुर मार्ग पर लगभग 15 किलोमीटर में हुए हैं सबसे ज्यादा हादसे
आखिर कब जागेगा शासन प्रशासन, कब लगेगी दुर्घटनाओं पर लगाम
तेंदूखेड़ा। तेंदूखेड़ा क्षेत्र में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं ताजा मामला बुधवार देर रात सामने आया है जब बड़ी बेटी की शादी का निमंत्रण देने गए एक पिता की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक रामबहादुर गौड़ 45 वर्ष , पिता कल्लू गौड़, निवासी ग्राम गाड़ाघाट, थाना पाटन, जिला जबलपुर, अपनी बड़ी बेटी की 27 जून को होने वाली शादी का निमंत्रण देने के लिए तेजगढ़ गए थे जहां से देर रात घर वापस लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी और चालक मौके से फरार हो गया। हादसे में रामबहादुर की मौके पर ही मौत हो गई। बेटी के विवाह की तैयारियों में जुटा परिवार इस दुखद घटना से सदमे में है। क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले लगभग छह माह में क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटनाओं में 30 लोगों की असमय मौत हो चुकी है। इन हादसों में महिला, पुरुष और बच्चे सभी शामिल हैं। बीते पांच वर्षों से क्षेत्र में दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और शायद ही कोई सप्ताह ऐसा गुजरता हो जब दो-तीन सड़क दुर्घटना सामने न आती हो। वर्ष 2024 में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा कई स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया था। इन स्थानों का निरीक्षण करने भोपाल से विशेषज्ञों की टीम भी पहुंची थी, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निरीक्षण के बाद अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पाया है। क्षेत्र के प्रमुख ब्लैक स्पॉटों में नरगुँवा घाट तेंदूखेड़ा से दमोह सीमा जबलपुर तरफ ,पंडा बाबा के समीप का क्षेत्र, तारादेही मार्ग पर धनगौर टेक, झलौन मार्ग पर नागबाबा के पास , बम्हौरी पाँजी टेक से झलौन तक का मार्ग शामिल है। विशेष रूप से बम्हौरी पाँजी से झलौन मार्ग पर सड़क किनारे स्थित पेड़ों के कारण कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब तक कोई उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया गया है। सबसे अधिक दुर्घटनाएं तेंदूखेड़ा से जबलपुर मार्ग पर दमोह सीमा तक के लगभग 15 किलोमीटर लंबे हिस्से में होती हैं। स्थानीय लोगों कपिल कुमार, अनिल कुमार गुड्डू दुबे ,राजकुमार का कहना है कि केवल पिछले छह माह में इस मार्ग पर करीब 20 लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में बुधवार को दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने टक्कर में दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। और तीन गंभीर घायल हुए जिसमें एक मासूम भी शामिल है वहीं बुधवार रात रामबहादुर गौड़ की मौत ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया। इसे किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी है इससे पहले जनवरी माह में राजेंद्र गौड़ नामक व्यक्ति को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। अप्रैल में गेहूं से भरे ट्रैक्टर को एक कंटेनर ने टक्कर मार दी थी, जिससे ट्रैक्टर पलट गया और चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। इसी तरह नागबाबा के पास भी दूसरे नंबर पर दुर्घटनाएं घटित होती हैं सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं अंधे मोड़ एवं पेड़ों की वजह से होती हैं जब तेज रफ्तार वाहन इन पेड़ों से टकराकर दुर्घटना को अंजाम देते हैं विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में अंधे मोड़, पर्याप्त संकेतकों का अभाव, तेज रफ्तार वाहन, दोपहिया चालकों द्वारा हेलमेट का उपयोग न करना, यातायात नियमों की अनदेखी तथा नशे की हालत में वाहन चलाना शामिल हैं। साथ ही नियमित वाहन जांच, प्रभावी चालानी कार्रवाई और जनजागरूकता अभियानों की कमी भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। क्षेत्रीय नागरिकों गोविंद राय ,ललित रजक, गोविंद सिंह ठाकुर, राजकुमार लोधी ,महेश मंगलम, सोनू राय, ने प्रशासन से ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, स्पीड कंट्रोल उपाय और सड़क सुरक्षा संबंधी अन्य व्यवस्थाएं शीघ्र लागू करने की मांग की है
इनका कहना
इस संबंध में एसडीएम सी.जी. गोस्वामी ने कहा कि केवल स्पीड ब्रेकर बनाना दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान नहीं है उन्होंने बताया कि चिन्हित ब्लैक स्पॉटों पर आवश्यक संकेतक, चेतावनी बोर्ड तथा अन्य सुरक्षा उपायों के संबंध में उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके