बनने के तीन साल बाद भी आज तक नगर परिषद ने नहीं कराई साफ सफाई सड़कों पर बह रही नाला की गंदगी लोगों के घरों में घुस रहा पानी कई स्थानों पर भरा मलवा
तेंदूखेड़ा। नगर परिषद द्वारा लगभग तीन वर्ष पहले सांदीपनि विद्यालय के पास से स्वास्थ्य विभाग के आवासीय परिसर तक जहां विभागीय कर्मचारी निवास करते हैं वर्षा जल की समुचित निकासी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक तरफ चौड़ा नाला निर्माण कराया गया था। इस योजना का उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों से होकर बहने वाले वर्षा जल को व्यवस्थित ढंग से नीचे तक पहुंचाना तथा जलभराव की समस्या से राहत दिलाना था हालांकि निर्माण के महज तीन वर्ष बाद ही इस नाले की स्थिति इसकी गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार नाले का निर्माण तीन-चार अलग-अलग हिस्सों में किया गया, लेकिन नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में अधिकांश स्थानों पर पानी की निकासी बाधित हो गई है हालात यह है कि बारिश के दौरान पानी नाले से बहने के बजाय सड़क पर फैल गया जिससे कई घरों में पानी घुस गया और रहवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर नाला क्षतिग्रस्त भी हो चुका है, जबकि कुछ हिस्सों में पूरी तरह जाम होने से पानी का प्रवाह रुक गया है। रंजीत साहू, महेश कुमार, हेमराज ,अशोक कुमार का कहना है कि नगर परिषद के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि विकास कार्य कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रहे हैं, जिसके कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर नाले की सफाई कराई जाती और निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ होता, तो जलभराव जैसी समस्या उत्पन्न नहीं होती। नगरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं और उनका नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा हर वर्ष बरसात में जलभराव की समस्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी रहेगी
इनका कहना
इस संबंध में नगर परिषद के उपयंत्री भूपेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि नाले की सफाई नहीं होने के कारण जल निकासी प्रभावित हुई है उन्होंने बताया कि वर्तमान में चौरई ग्राम में सफाई कार्य कराया जा रहा है तथा रविवार को संबंधित नाले की भी सफाई कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना की स्वीकृत लागत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये थी, लेकिन केवल 70 से 75 लाख रुपये का कार्य ही हुआ हैं। नाले का निर्माण भी तीन-चार अलग-अलग चरणों में किया गया है