हाईवे पर बड़ी संख्या में बैठने लगे मवेशी बन रहे हादसों की वजह मवेशी भी हो रहे घायल
गौशालाएं बनी शोपीस ग्रामीण इलाकों की सड़कों व हाईवे पर मवेशियों के जमावड़े को लेकर जिम्मेदार मौन व अनजान
तेंदूखेड़ा। नगर की प्रत्येक सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा तो पहले से ही लगा रहता है, लेकिन इस समय मवेशियों के अधिक संख्या में बैठने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दमोह से जबलपुर जाने वाले स्टेट हाईवे 15 पर मवेशियों की संख्या इस समय सबसे अधिक देखने को मिल रही है। साथ ही दमोह से तारादेही मार्ग पर भी मवेशियों का झुंड बैठा हुआ नजर आता है। वहीं रात के समय अचानक से वाहनों के सामने मवेशी आ जाने से हादसे होते रहते हैं, तो वहीं वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार शिकायत के बाद भी जिम्मेदार लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं अब बारिश का दौर भी शुरू हो चुका है। जिस वजह से रात के वक्त जंगली इलाकों से निकले मुख्य मार्गों व हाइवे पर मवेशियों के नजर नहीं आने से दुर्घटनाएं भी हो रही हैं शाम होते ही सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है।
गौशालाएं पड़ी हैं खाली
सड़कों पर बैठे व नगर में घूमने वाले बेसहारा मवेशियों की देखरेख व सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा तेंदूखेड़ा ब्लॉक की कुछ ग्राम पंचायतों में सरकारी गौशालाएं बनवाई गई हैं, लेकिन इन गौशालाओं में निर्माण में संबंधितों द्वारा गड़बड़ी कर दी गई और सरकारी राशि का आहरण कर बंदरबांट कर लिया गया। जिससे कहीं गौशालाएं पूरी तो कहीं अधूरी बनकर रह गई हैं। कुछ गौशालाएं खाली पड़ी हैं और कागजों में मवेशियों का संरक्षण बताया जा रहा है
जुर्माना लगाने की कवायद भी फेल
बता दें कि पिछले वर्ष सरकार द्वारा एक आदेश जारी किया गया था जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और खुले स्थानों पर मवेशियों व अन्य पशुओं को छोड़ने पर पशु पालक पर 1 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाने कहा गया था। यह जुर्माना लगाने का अधिकार स्थानीय निकाय को दिया गया है निकाय कर्मियों को पशु मालिक की पहचान करनी होगी। बताया जा रहा है कि यह पहचान पशुओं के कान पर लगे टैग से होगी। हालांकि जिले के अधिकांश जगहों पर पशुओं पर यह टैग नहीं लगे होने के कारण ऐसे मवेशियों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है गौर करने वाली बात ये हैं कि प्रशासन द्वारा आज तक इस ओर कोई कार्रवाई नहीं की गई है
इस संबंध में जब नगर परिषद के प्रभारी सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने बात करने संपर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीव करना जरूरी नहीं समझा गया जिसके कारण बात नहीं हो सकी