पुल बंद होते ही बढ़ी मुसीबत! जान जोखिम में डालकर 26 किलोमीटर अतिरिक्त सफर कर रहे लोग
झापन घाट पुल बंद होने से बढ़ी परेशानी, 26 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करने को मजबूर राहगीर हरदुआ–इमलिया मार्ग की बदहाल स्थिति पर ग्रामीणों ने जताई चिंता, कलेक्टर से की तत्काल सुधार की मांग
तेंदूखेड़ा। लगातार हो रही तेज बारिश के चलते स्टेट हाईवे-21 स्थित झापन घाट पुल बुधवार को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल बंद होने के कारण जबलपुर, पाटन, रहली और सागर की ओर आने-जाने वाले सभी छोटे-बड़े वाहनों को अब करीब 26 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। यातायात का पूरा दबाव हरदुआ, खरा, राघाट, इमलिया, लकलका, सोमखेड़ा होते हुए झापन घाट मार्ग पर आ गया है, जिससे लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हरदुआ से इमलिया एवं खरा-राघाट तक का यह मार्ग पहले से ही संकरा और कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जबकि अधिकांश हिस्सों में सड़क किनारे की साइड पट्टियां नहीं होने या मिट्टी धंस जाने के कारण वाहन चालकों को बारिश के दौरान भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है। मार्ग पर कई अंधे मोड़ भी हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि झापन घाट पुल बंद होने के बाद इस मार्ग से भारी वाहनों, लोडिंग ट्रकों, स्लीपर कोच बसों और अन्य बड़े वाहनों का आवागमन बढ़ गया है। सड़क की चौड़ाई कम होने और किनारों की स्थिति खराब होने के कारण वाहन पलटने या आमने-सामने की टक्कर जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा मार्ग के किनारे लगे कई बड़े पेड़ों की शाखाएं सड़क पर झुकी हुई हैं, जो विशेष रूप से ऊंचे वाहनों के लिए खतरा बनी हुई हैं। ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि हाल ही में तेंदूखेड़ा और तेजगढ़ क्षेत्र में पेड़ गिरने से एक सप्ताह के भीतर तीन लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में यदि समय रहते वैकल्पिक मार्ग पर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि हरदुआ–इमलिया मार्ग की साइड पट्टियों को तत्काल मुरम डालकर मजबूत कराया जाए, सड़क पर बने गड्ढों की मरम्मत कराई जाए तथा सड़क पर झुकी हुई पेड़ों की शाखाओं की छंटाई कराई जाए। उनका कहना है कि झापन घाट पुल बंद रहने की अवधि में इस मार्ग पर यातायात का दबाव लगातार बना रहेगा, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र कराया जाना चाहिए, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।