विवाह के अंतिम तीन शुभ मुहूर्त 9, 11 और 12 जुलाई, इसके बाद चातुर्मास में मांगलिक कार्यों पर रहेगा विराम
तेंदूखेड़ा। विवाह सीजन अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस माह 9, 11 और 12 जुलाई विवाह के लिए अंतिम शुभ मुहूर्त हैं। 12 जुलाई के बाद विवाह समारोहों पर लगभग चार माह का विराम लग जाएगा। इसके पश्चात नवंबर में देवउठनी एकादशी के साथ पुनः मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा। इस संबंध में पंडित बलराम शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके साथ ही चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य परंपरागत रूप से नहीं किए जाते। चातुर्मास के दौरान जप, तप, व्रत, दान, सत्संग, कथा-श्रवण एवं भगवान की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी के अवसर पर देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी, जब भगवान विष्णु के जागरण के साथ तुलसी-शालिग्राम विवाह संपन्न होगा और विवाह सहित सभी शुभ कार्य पुनः प्रारंभ हो जाएंगे। इधर, अंतिम तीन विवाह मुहूर्तों को लेकर नगर एवं क्षेत्र में मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल, कैटरिंग, बैंड-बाजा और सजावट से जुड़े व्यवसायों में जबरदस्त व्यस्तता देखी जा रही है। अधिकांश विवाह स्थलों की बुकिंग पहले से ही पूर्ण हो चुकी है और परिवार तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। वहीं, मानसून के कारण विवाह आयोजनों में विशेष व्यवस्थाओं का चलन भी बढ़ा है। खुले लॉन के स्थान पर वॉटरप्रूफ टेँट की व्यवस्था चल रही हैं आयोजनकर्ताओं का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए बरसात से बचने के लिए व्यवस्थित जगह देखी जा रही है