बारिश में बगदरी और किशनगढ़ जलप्रपात बने आकर्षण का केंद्र, लेकिन जरा-सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
तेंदूखेड़ा। नगर एवं आसपास के क्षेत्र में इन दिनों झमाझम बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही वर्षा से पूरा इलाका हरियाली की चादर से ढक गया है। पहाड़ों, नालों और झरनों से बहता पानी प्राकृतिक सौंदर्य का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। बारिश के मौसम में क्षेत्र के कई प्राकृतिक पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इनमें किशनगढ़ एवं दमोह-जबलपुर सीमा से लगे बगदरी जलप्रपात पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। हालांकि, जितना यह प्राकृतिक सौंदर्य मन को लुभाता है, उतना ही बरसात के दौरान यह क्षेत्र जोखिम भरा भी साबित हो सकता है।
तेंदूखेड़ा से जबलपुर मार्ग पर दमोह जिले की सीमा समाप्त होने के लगभग 500 मीटर आगे जबलपुर जिले में स्थित बगदरी जलप्रपात इन दिनों पूरे शबाब पर है। ऊंचाई से गिरता जल और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। लेकिन बारिश के मौसम में यह जलप्रपात बेहद खतरनाक रूप धारण कर लेता है। ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली बारिश के कारण यहां अचानक जलस्तर बढ़ जाता है और तेज बहाव की स्थिति बन जाती है, जिससे कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
बगदरी जलप्रपात वर्ष 2014 की एक दर्दनाक घटना का भी गवाह है। 4 अगस्त 2014 को यहां पिकनिक मनाने पहुंचे जबलपुर के तीन परिवारों के 11-12 सदस्य अचानक आई बाढ़ की चपेट में आ गए थे। जब वे झरना पार कर दूसरी ओर पहुंचे, तब पानी का स्तर सामान्य था, लेकिन कुछ ही देर बाद ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते तेज बहाव ने लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इस हृदयविदारक हादसे में सात से आठ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि अन्य लोग लापता हो गए थे। सूचना मिलने पर प्रशासन एवं गोताखोरों की टीम ने राहत और बचाव अभियान चलाकर कई शव बरामद किए थे। इसके बाद भी बरसात के दौरान यहां एक-दो अन्य दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
बारिश के मौसम में क्षेत्र के अन्य नदी-नाले और झरने भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ऐसे में प्रशासन और पुलिस लगातार लोगों से सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इनका कहना --
नगर निरीक्षक तेंदूखेड़ा सरोज ठाकुर ने पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि बरसात के मौसम में जलप्रपातो सहित किसी भी नदी, नाले या झरने के तेज बहाव के बीच जाने का जोखिम न उठाएं। जलधाराओं को पार करने, चट्टानों पर बैठकर फोटो या सेल्फी लेने तथा सुरक्षा सीमाओं का उल्लंघन करने से बचें। मौसम और जलस्तर में अचानक परिवर्तन हो सकता है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।