सागर में स्कूल वाहनों की सघन जांच, नियम तोड़ने वाली वैन जब्त, शिक्षा विभाग को लिखा पत्र
सागर। स्कूल में अध्ययनरत ऐसे छात्र-छात्राएं, जो स्कूली वाहनों से स्कूल आते-जाते हैं, उनकी सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर आज नरयावली, जिला सागर में स्कूली वाहनों की सघन चेकिंग की गई। इस दौरान मारुति वैन क्रमांक एमपी-04-बीए-5622, जो श्री रामभरोसे पाल पिता श्री नंदकिशोर पाल, निवासी नरयावली, जिला सागर के नाम पर पंजीकृत है, क्षमता से अधिक 18 स्कूली बच्चों का परिवहन करती हुई पाई गई। वाहन को नरयावली में रोककर चेक किया गया। चालक से वाहन के दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह मौके पर कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।वाहन के पिछले भाग की डिक्की खोलकर देखने पर उसमें एलपीजी गैस किट लगी हुई पाई गई, जिसके ऊपर बच्चों को बैठाने के लिए सीट लगाई गई थी। अर्थात वाहन एलपीजी गैस से संचालित किया जा रहा था। उक्त वाहन इस कार्यालय में प्राइवेट श्रेणी में पंजीकृत होकर अनाधिकृत रूप से स्कूली बच्चों के परिवहन में उपयोग किया जा रहा था, जो मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 39 का उल्लंघन है। क्योंकि जो वाहन जिस कार्य के लिए पंजीकृत होता है, उसका उपयोग उसी कार्य के लिए किया जा सकता है। इस कारण मारुति वैन क्रमांक एमपी-04-बीए-5622 को मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 207 के तहत जब्त कर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर कार्यालय परिसर में सुरक्षित रखा गया है। सभी स्कूल बस संचालकों एवं स्कूल प्रबंधन को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की चेकलिस्ट एवं अन्य आवश्यक निर्देशों की प्रति प्रदान की गई थी। साथ ही स्कूल प्रबंधन के लिए निम्नलिखित मापदंड निर्धारित किए गए थे। स्कूल प्रबंधन यह संपूर्ण ब्यौरा रखे कि कौन-सा बच्चा किस वाहन से स्कूल आ रहा है अथवा स्कूल से जा रहा है। बच्चों के परिवहन में लगे सभी वाहनों के आवश्यक दस्तावेज, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस वेरिफिकेशन, वाहन पंजीयन, फिटनेस, परमिट, बीमा एवं पीयूसी प्रमाण-पत्र की प्रति विद्यालय में उपलब्ध रहे। एलपीजी से संचालित वाहन का उपयोग स्कूली वाहन के रूप में नहीं किया जाए। यदि ऐसा पाया जाता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस प्रशासन एवं परिवहन विभाग को दी जाए। अन्यथा दुर्घटना की स्थिति में संपूर्ण जवाबदेही स्कूल प्रबंधन की होगी। प्रत्येक वाहन में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही बच्चों का परिवहन किया जाए।वाहनों से बच्चों को स्कूल परिसर के सुरक्षित स्थान पर सीसीटीवी निगरानी में ही उतारा एवं चढ़ाया जाए। प्रत्येक वाहन में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड किट, जीपीएस, स्पीड गवर्नर एवं सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगे हों। स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूली वाहनों में लगे जीपीएस की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक स्कूल में स्कूली शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार ष्शाला परिवहन समन्वय समितिष् का गठन किया जाए।दिनांक 04.07.2026 को मंगलम कॉन्वेंट स्कूल, बाघराज, सागर में संचालित एक ओमनी वैन भी चेकिंग के दौरान जब्त की गई थी, जिसमें एलपीजी गैस किट लगी हुई थी। स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी निर्धारित करने तथा स्कूल के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी, सागर को पत्र लिखा गया है। स्कूल प्रबंधन से बार-बार अपील की जा रही है कि संस्था में ऐसे वाहनों का प्रवेश न होने दें, जो एलपीजी गैस किट लगाकर संचालित किए जा रहे हों। इसके बावजूद कई स्कूलों द्वारा छात्र-छात्राओं की सुरक्षा संबंधी मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, सागर के साथ समन्वय किया जा रहा है।क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर ने बताया कि लगातार चेकिंग के बावजूद कुछ वाहन स्वामी एलपीजी गैस किट लगाकर स्कूली वाहन संचालित कर रहे हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है तथा सुरक्षा मानकों के विपरीत है। उन्होंने समस्त अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे स्कूली वाहनों में स्कूल न भेजें, जो एलपीजी गैस किट से संचालित हों या अनफिट प्रतीत होते हों।