तेंदूखेड़ा में नर्मदा जल योजना बनी परेशानी का कारण, गंदा और मटमैला पानी मिलने से लोगों में भारी आक्रोश
तेंदूखेड़ा। नगर में लगभग 45 किलोमीटर दूर लम्हेटाघाट से लाई गई नर्मदा जल प्रदाय योजना नगरवासियों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई इस योजना के बावजूद नगर के लोग नियमित और स्वच्छ पेयजल के लिए परेशान हैं। कभी पानी की सप्लाई का समय अनिश्चित रहता है, कभी पानी का दबाव इतना कम होता है कि लोगों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता, तो कई बार निर्धारित समय पर पानी आता ही नहीं है।
रविवार को वार्ड क्रमांक-1 में हुई पानी की सप्लाई के दौरान लोगों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब नलों से गंदा और मटमैला पानी निकलने लगा। लोगों का कहना है कि जिस नर्मदा जल को फिल्टर कर शुद्ध रूप में उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, वह वास्तव में गंदगी से भरा हुआ है। पानी में मिट्टी और अन्य अशुद्धियां साफ दिखाई दे रही थीं, जिससे लोगों में बीमारियों का खतरा बढ़ने की चिंता भी गहरा गई है।
स्थानीय नागरिक राजेंद्र शर्मा ने कहा कि लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत वाली यह योजना पूरी तरह असफल साबित हो रही है। उनका कहना है कि यदि यही राशि नगर के पुराने जलाशय की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर खर्च की जाती, तो आज नगरवासियों को पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने इस योजना को "पूरी तरह ओपन फेल" बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
वहीं रोशनलाल ने बताया कि दो से तीन दिनों के अंतराल में पानी की सप्लाई हो रही है और ऊपर से जो पानी मिल रहा है, वह भी गंदा एवं मटमैला है। उनका कहना है कि ऐसा पानी पीने से लोगों के बीमार होने की आशंका बनी हुई है। नागरिकों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद शासन और प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहा है।
नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि नर्मदा जल योजना की गुणवत्ता, जल शोधन व्यवस्था और वितरण प्रणाली की तत्काल जांच कराई जाए तथा नियमित, स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि लोगों को इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।
इस संबंध में जब नगर परिषद की उपयंत्री भूपेंद्र सिंह को फोन लगाया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ आ रहा था
इस संबंध में जब एसडीएम सीजी गोस्वामी को फोन लगाया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया