ईश्वर की कृपा, अजनबी की इंसानियत और लौट आई जिंदगी... चारधाम यात्रा में मौत को मात देकर लौटीं अनीता नामदेव
रिपोर्ट - विशाल रजक
तेंदूखेड़ा। कहते हैं कि जब ईश्वर की कृपा साथ हो तो बड़ी से बड़ी विपत्ति भी टल जाती है। कुछ ऐसा ही नगर के वार्ड क्रमांक-8, विद्यानगर निवासी अनीता नामदेव की चारधाम यात्रा के दौरान घटी घटना इस कहावत को साकार करती है। एक पल ऐसा आया जब लोगों ने उन्हें मृत मान लिया था, लेकिन भगवान महादेव की कृपा, समय पर मिले उपचार और एक अज्ञात धर्मात्मा की निस्वार्थ मदद ने उन्हें नया जीवन दे दिया।
पंडित गोविंद मिश्रा (बम्हौरी माल) के नेतृत्व में तेंदूखेड़ा एवं आसपास के क्षेत्रों के लगभग 50 श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर निकले थे। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं ने हरिद्वार, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के दर्शन किए। इसके बाद गौरीकुंड से केदारनाथ की कठिन चढ़ाई शुरू हुई। कोई पैदल तो कोई घोड़े के सहारे आगे बढ़ रहा था। सबसे पीछे घोड़े पर सवार अनीता नामदेव अचानक गौरीकुंड से लगभग पांच किलोमीटर ऊपर घोड़ा पीछे पलटा और उन्हें गिरा दिया जिससे उनके सिर पर भारी चोट पहुंची और उनकी सांसे थम गई मौके पर मौजूद लोगों ने जब उनकी सांस और नब्ज देखी तो कोई हलचल नहीं मिली। अन्य जगह की अनजान लोग जो यात्रा में चल रहे थे उन्होंने पहले छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, जिससे लोगों को लगा कि उनकी सांसें थम चुकी हैं। इसके बाद दूसरा ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया उनकी सांसें लौट आईं और वहां मौजूद लोगों के चेहरों पर फिर उम्मीद दिखाई देने लगी। उसी समय एक अज्ञात धर्मात्मा व्यक्ति ने बिना किसी परिचय के चार हजार रुपये देकर उन्हें पिट्टू सवारी से तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था कराई। गौरीकुंड के अस्पताल में उपचार मिलने के बाद दो दिनों में उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। इधर, आगे निकल चुके उनके पति चोखेलाल नामदेव को जब पत्नी के पीछे रह जाने का पता चला तो वे तुरंत वापस लौटे और अनजान लोगों द्वारा जानकारी मिलने पर अस्पताल पहुंच गए। उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर दोनों ने बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर अपनी यात्रा पूरी की। बाद में जबलपुर के एक निजी अस्पताल में कराई गई जांच में भी उनकी सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। यात्रा में शामिल नगर एवं क्षेत्र के मिथिलेश अहवासी, अनिल पटेरिया, शिवराम अहवासी, ईश्वर दास शर्मा, लखन सोनी, गोविंद मिश्रा, वंदना अहवासी, ज्योति अहवासी और खुशबू लोधी ने बताया कि जब तीसरे दिन बस में अनीता नामदेव को स्वस्थ देखा तो कई श्रद्धालु भावुक हो उठे। वहीं बद्रीनाथ में घटना के दौरान निकले चंडीगढ़ के कुछ लोगों ने आश्चर्य से कहा, हमें तो लगा था कि आपकी सांसें थम गई थीं, लेकिन भगवान ने आपको नया जीवन दे दिया। हालांकि इस हादसे के कारण अनीता और उनके पति चोखेलाल नामदेव की केदारनाथ धाम की यात्रा अधूरी रह गई। उनका कहना है कि भगवान महादेव ने उन्हें नया जीवन दिया है और यही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है। अब उन्होंने संकल्प लिया है कि ईश्वर की कृपा रही तो अगले वर्ष दोबारा केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन अवश्य करेंगे। उनके लिए यह यात्रा अब केवल तीर्थ नहीं, बल्कि जीवन का दूसरा अवसर और मानवता पर अटूट विश्वास की अमिट याद बन चुकी है।