गांव में मुक्तिधाम नही, खेत की मेड़ पर अंतिम संस्कार, लोग बोले तेज बारिश होने पर घंटों इंतजार करना पड़ता
सागर/खुरई। जनपद पंचायत के बागथरी गांव में मुक्तिधाम न होने की वजह से गांव वालों को अंतिम संस्कार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार दोपहर गांव की एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला वेती बाई के निधन के बाद तेज बारिश की वजह से उनके अंतिम संस्कार में एक घंटे की देरी हुई। आखिरकार ग्रामीणों को मजबूरी में एक खेत की मेड़ पर ले जाकर उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा। बारिश के दिनों में ग्रामीण इलाकों में अंतिम संस्कार की यह समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है, क्योंकि कई गांवों में आज भी श्मशान घाट की सुविधा नहीं है। सरकार पंच परमेश्वर और मनरेगा जैसी बड़ी योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में कई पंचायतों में अब तक मुक्तिधाम नहीं बन पाये हैं। गांव वालों का सीधा आरोप है कि इन सरकारी योजनाओं के कागजी कामकाज में भारी भ्रष्टाचार होता है, जिसके कारण जनता को जरूरी सुविधायें नहीं मिल पाती हैं। गांव के रहने वाले सोनू अहिरवार, मोतीलाल अहिरवार, राजू अहिरवार समेत अन्य लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में अगर किसी की मौत हो जाये, तो अंतिम संस्कार करना किसी आफत से कम नहीं होता। तेज बारिश होने पर शव को लेकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गांव में श्मशान न होने से उन्हें कीचड़ से सने रास्तों से गुजरकर दूसरों के निजी खेतों की मेड़ पर अंतिम संस्कार करने जाना पड़ता है। ग्रामीण पिछले कई सालों से इस समस्या के पक्के समाधान और गांव में मुक्तिधाम बनवाने की मांग कर रहे हैं। जब खुरई जनपद पंचायत सीईओ मीना कश्यप से बात की, तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में गांव के सरपंच और सचिव से पूरी जानकारी ली जायेगी। वे पता लगायेंगी कि गांव में मुक्तिधाम बनने में आखिर क्या परेशानी आ रही है और इसका समाधान क्यों नहीं हुआ।